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Laam (Hindi)

Author :Parameshwar Jha ‘Prahari’

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यह पुस्तक प्रस्तुत करते हुए मुझे अपार हर्ष हो रहा है। देश के अधिकांश भागों का भ्रमण करते हुए और उमड़ते-घुमड़ते बादलों, हिमालय की अनछुई वादियों का आनंद ले अब जब वापस आ बैठा हूँ तो वो यादें अनायास ही चली आती हैं और एक सुखद अनुभूति छोड़ जाती हैं। यूं...

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परमेश्वर झा 'प्रहरी' , जन्म- २३ सितंबर १९५२, मिथिला, बिहार पटना विश्वविद्यालय स्नातक कर भारतीय सेना के मेकनाईज्ड इन्फेंट्री में अफ़सर योधा बन वर्षो...

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Category :History & Biographies

Print ISBN No :9789389097665

Language :Hindi

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यह पुस्तक प्रस्तुत करते हुए मुझे अपार हर्ष हो रहा है। देश के अधिकांश भागों का भ्रमण करते हुए और उमड़ते-घुमड़ते बादलों, हिमालय की अनछुई वादियों का आनंद ले अब जब वापस आ बैठा हूँ तो वो यादें अनायास ही चली आती हैं और एक सुखद अनुभूति छोड़ जाती हैं। यूं तो हर दिन की घटनाएं अद्भुत होती हैं पर यहां मैं कुछ खास समाजोपयोगी तथ्यों को ही लाया हूं। कई जरूरी बातें जो बीते समय के धूल की पड़तों मे ओझल हो चुकी जरूरी बातों को कुछ विस्तार से समझाया है, ताकि गंभीर मामलों को सही परिप्रेक्ष्य में समझा जा सके। सजीव दृष्टांतों के लिए तो मष्तिष्क पर जोर नहीं डालना पड़ता, पर बीते उम्र की छोटी से छोटी गलतियां कई रातों की नींदें उड़ा ले जाती हैं। न तो उन गलतियों पर वापस जा कर सुधारा जा सकता है, ना मिटाया जा सकता है। बस एक कचोट रह जाती है! आगे और भी रोचक बातें लिखुंगा। अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें, व्हाट्स अप / मोबाइल संख्या 9008877925

AUTHOR INFORMATION

परमेश्वर झा 'प्रहरी' , जन्म- २३ सितंबर १९५२, मिथिला, बिहार पटना विश्वविद्यालय स्नातक कर भारतीय सेना के मेकनाईज्ड इन्फेंट्री में अफ़सर योधा बन वर्षों सेवारत रहने के बाद अवकाश प्राप्ति के पश्चात स्वाध्याय, मैथिली एवं हिन्दी भाषा, योग, कृषि, वृक्षारोपण, समाजसेवा, राजनीति व लेखन में लगे रहे हैं और अपने विचारों एवं अनुभवों से समाज को समृद्ध बनाते रहे हैंI इनकी लेखनी में सारगर्भिता है और विचार तथ्यपरक होते हैं I इनकी कविताएँ स्व-अनुभूत स्मृतियों व कल्पनाओं का मिश्रण होती हैं और जीवन के हर पहलू को छूते हुए एक नये अनुभूति का संचार करते हैं I ये एक सक्रिय योग साधक हैं और योग संबंधी इनका संकलन 'परम योग तत्व' समाज के लिए एक बहुमूल्य पुस्तक है I